व्यंग्य: क्योंकि हम इन्सान हैं।

प्रभु सब तेरी माया है। तुने ही संसार बनाया है। तेरी मर्जी के बिना पत्ता तक नहीं हिल सकता, सत्य है। लेकिन परमेश्वर तू धरती पर आकर तो देख, तू खुद हिल जायेगा। प्रभु सतयुग में आकर लीला कर गये। पता है हमें आपने राम बनकर मर्यादा का पाठ पढाया था। सुधर के रख दिया आपने राक्षसों को और जो न सुधरे उनको पहुंचा दिया ऊपर। तुमने कृष्ण बनकर प्रेम की गंगा बहा दी, खूब बंसी बजायी, पर अपनी समझ में ये नहीं आता दीनबंधु की आपने तो बंसी बजाना सिखाया था, ये कलयुगी मानव बंद बजाना कहाँ से सीख गया। ठीक है अयोध्यापति, आपने राम बनकर अयोध्या पर शासन किया था। हे द्वारिकाधीश, संसद की अध्यक्षता करके बताइए, आपको पता चल जायेगा। जब सत्तापक्ष अपने महान कार्यों के बारें में बताएगा। हम तो कहते हैं, इन बातों को मारिये गोली। अगर आप से मिलने सुदामा आएगा तो आप उनसे मिलेंगे या नहीं, इस बात पर करोड़ों रूपये का सत्ता लग जायेगा।


          हे अंतर्यामी। आपको तो पहले से ही पता था की कलियुग आएगा। आपने यह नहीं सोचा होगा की हिंदुस्तान इतना बदल जायेगा। अगर आप धरती पर आ जाएँ न, सत्य बता दें, आपकी मुलाकात तो बाद में होगी। सबसे पहले तो आपने कुल कितना मक्खन चुराया था, इसकी निष्पक्ष जाँच होगी। आपकी १६,१०८ पत्नियाँ थी, फिर आपको एड्स हुआ या नहीं, इसके बारें में पूँछताछ एवं जांच होगी। अगर एड्स हुआ था, तो आप इतने दिन तक  जीवित  कैसे रह लिए, इस पर रिसर्च  होगी। चुनाव लड़के देख लेना, अगर जीतना है तो वोटरों (मतदाताओं) को मदिरा (दारू) पिलानी पड़ेगी। राम बनकर लादे तो प्रभु जी, हनुमान जी को बूथ कैप्चर करना ही पड़ेगा।

          आपको बता दें, पार्षद से लेकर सांसद तक हर बात पर जाँच करवाते हैं। संतरी से लेकर मंत्री तक, कलेक्टर से लेकर चपरासी तक भ्रस्टाचार की बीमारी है। प्रभु किस किस का इलाज करवायेंगे आप ! हमें तो डर है कि यहाँ आकर और लोगों की संगति में पड़कर कहीं आप भी रिश्वतखोर न बन जाएँ।

          प्रभु, एक बात बताएं, आप तो सीता मैया से कह देना कि इस मर्त्युलोक की तरफ न देखें, अब नारी भी जरा कम से कम वस्त्र पहनना पसंद करती है। वे देखेंगी तो उन्हें दुःख होगा, मैं ने क्या सिखाया था और क्या हो रहा है? उधर परलोक में बेचारा दु:शासन परेशान होगा कि मैं यहाँ हूँ तो फिर पृथ्वीलोक पर ये चीरहरण कौन कर रहा है। उधर भीम भैया परेशान होंगे, अगर ये गलती दु:शासन करता तो उन्हें फिर से...। पर आज की द्रौपदी तो खुद अपने वस्त्र त्याग  रही है। हमें लगता है एक दिन दुपट्टा तो ऐसे गायब हो जायेगा जैसे अपना...।

          हे प्रभु, लक्ष्मण भैया, भारत भैया और सत्रुघ्न भैया से से भी कह देना कि इस पृथ्वीलोक की तरफ न देखें, नहीं तो आपके विष्णुलोक में भी बंटवारा हो जायेगा। और अपने सूचना एवं प्रसारण मंत्री नारद जी से भी कह देना पृथ्वीलोक के समाचार स्वर्ग में न सुनाएँ, नहीं तो वहाँ भी व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी।
अपना आज का कार्यक्रम यहीं समाप्त करते हैं। अंत में आपको एवं सभी देवताओं को टाटा एवं बाय-बाय।

21 दिसंबर, 2005 , कक्षा : 9th

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