आज को जिएं, खुश रहें।

कल क्या होगा? इस चिंता में लोग अक्सर अपने आज के साथ नाइंसाफ़ी कर बैठते हैं। परेशान रहने से किसी समस्या का समाधान नहीं होने वाला। आने वाला कल कैसा होगा यह बहुत कुछ हम पर निर्भर करता है। अपने आज को जिंएं, ख़ुश रहें। काम वक्त पर करने की ईमानदारी से कोशिश करें।

          इस बात का कोई महत्व नहीं है कि आप की उम्र क्या है, व्यवसाय क्या है, या आप कब से कोशिश कर रहे हैं? अगर कोई बात मायने रखती है तो यह कि आज आज की तारीख में क्या कर रहे हैं? हौंसले बुलंद रखिये क्योंकि शायद आज ही वह दिन है जब आपकी कोशीश रंग लाएगी।

          अपनी क्षमताओं का आंकलन करते समय कभी भी खुद को किसी से कम न समझें। आत्ममुग्ध होना गलत है, तो खुद को हेय समझना उससे भी ज्यादा गलत। आज जैसे भी हैं, वह बीते हुए कल के काम की बजह से हैं। कल आप कैसे होंगे, यह आज के काम पर निर्भर करेगा। तो क्यों ना कल खुद को मजबूत स्थिति में पाने की कोशिश करें।



          आज के काम को कल पर यह सोच कर टाल देना कि कल जब समय बेहतर होगा तो इसे कर लेंगे, कतई सही नहीं है। सही समय की तलाश करना, मरुस्थल में जल खोजने के सामान है। किसी काम को करने के लिए वर्तमान ही सबसे श्रेष्ठ समय है और बिना एक पल गवाएं अपने कार्य में जुट जाने से ही सफलता मिलेगी। समय की हत्या (बर्बादी) आत्महत्या से कम नहीं है। काम को भविष्य के लिए टाल देने से कुछ वक्त के लिए तो आप उस काम से बच जाते हैं पर, स्वयं आप तथा अन्य कितने लोग प्रभावित होते हैं, इसका अंदाजा नहीं हो पता।

          अगर हम अपने सारे कामों को निर्धारित वक्त पर करें, तो हमारी कार्य-क्षमता में जबरदस्त वृद्धि हो जाती है। साथ ही वक्त कम रह जाने पर जल्दबाजी में होने वाली गलतियों से भी बच जाते हैं। समय ही असली धन है और काम को समय पर करके ही जीवन में सफलता पाई जा सकती है।

          हर कार्य का एक निश्चित समय होता है। जरुरी कार्य को करने के लिए खास समय का इंतजार करना तो ठीक है पर, उस दौरान अपने बाकी कार्यों को छोड़ देना भला कहाँ की समझदारी है? संवभ है कि जिस काम की उपयोगिता आपको आज ना दिख रही हो, वह भविष्य में निकल कर आये।

          हर समय खुद को काम में व्यस्त रखना ही समय का सदुपयोग नहीं है, अपितु कार्य को निर्धारित वक्त पर करना, सभी कार्यों एवं परिस्थितियों के बीच सही तालमेल बिठाना ही समय का सदुपयोग है।

          समय के सदुपयोग से ही आदमी सफलता की सीढ़ी चढ़ता है। आज का काम आज ही करने की आदत डालेंगे तो कार्य करने में न केवल आनंद आएगा, साथ ही वक्त की उपयोगिता भी पता चलेगी।

          वर्तमान की कठिनाइयों से झूझते समय हमें अक्सर महसूस होता है कि हमारा आज इतना संघर्षशील है तो भविष्य कैसा होगा? क्या हम भविष्य की कठिनाइयों का सामना कर पाएंगे? ऐसे विचार मन में आते ही मुसीबतों से टकराने की हमारी आधी ताकत तो यूँ ही खत्म हो जाती है। तो क्या हम भविष्य की कठिनाइयों से डरकर उनसे टकराने का इरादा ही छोड़ दें या फिर दुगुने जोश से उन्हें हराने के लिए आज ही कमर कस लें।

          वर्तमान ही हमारा भविष्य तय करता है। अगर हम अपनी जिम्मेदारियों को वर्तमान में ही पूरा कर दें, तो भविष्य में कोई चिंता ही नहीं रहेगी। इसलिए सारे काम व्यवस्थित रूप से आज ही करें।

          अपने कार्यों के दूरगामी परिणामों को हमेशा ध्यान में रखें। अगर वर्तमान का कोई कार्य भविष्य में आपको कठिनाई में डाल सकता है तो ऐसे कार्य का चुनाव करते समय सावधानी बरतें। जो काम आज जरुरी है उसे आज ही पूरा करें। कार्य को कल पर टालने से आज जैसी गंभीरता कल आ पाना बडा मुश्किल है। कार्य के बहुत सारे पहलू जो आपको आज जरुरी लग रहे हैं, संभव है वे बाद में इतने जरुरी न लगें और इस बजह से कोई जरुरी बात आप भूल जाएँ।

          कार्य को आगे टालने से आप उस सहायता से बंचित हो सकते हैं जो समय पर कार्य पूरा करने से आप को मिल सकती थी। याद रखें की कार्य को आपने आगे टाला है ना कि आपके मददगारों ने। इसलिए भविष्य में भी यह कार्य आपको ही पूरा करना पड़ेगा, वो भी आपके मददगारों की मदद के बिना, जिससे आपकी मुश्किल और बढ़ जाएगी है। इसलिए अपने हर कार्य को समय पर ही पूरा करें।

          जब हम कार्य को एक बार में ही पूरा करने की ठान लेते हैं तो उसके बहुत से अनछुए पहलू अनायास ही सामने निकल कर आते हैं। हम कार्य को पूरा करने में जब गंभीरता दिखाते हैं तो परिणाम हमेशा अच्छे ही आते हैं।

          अक्सर हम कल में जीते हैं। कभी वह बीता हुआ कल होता है तो कभी आने वाला कल और अधिकांशतः कल से जुड़ा होता है डर। बीते हुए कल में जो घट चुका है और आने वाला कल कैसा होगा, दोनों कल ही हमें सताते रहते हैं। क्यों ना हम कल के इस झमेले से बाहर निकल कर आज में जिएं।

          ना तो हम बीते हुए कल का कुछ बदल सकते हैं और ना ही आने वाले कल में क्या होगा, इसका पता कर सकते हैं, तो क्या ये बेहतर नहीं होगा कि हम आज में जीना शुरू कर दें? जिस समय में हम जी रहे हैं, क्या ये बेहतर नहीं होगा कि हर चिंता छोड़कर उस पल को जी लें?

          आज में जीने से आप अपना पूरा ध्यान उस काम में लगा सकते हैं जिसे आप उस समय कर रहे हैं। इससे आपकी रचनात्मकता, क्रियात्मकता और गुणात्मकता में भी अनपेक्षित एवं अप्रत्याशित सुधार होगा।

          बस यही है हम सब की आज की जिंदगी। यही "आज" वह दिन है जब हम नई शुरुआत करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। जीवन का आनंद लेना शुरू कीजिये। सफलता की सीढियाँ चढ़ना शुरू कीजिये। कल से नहीं, आज से। क्योंकि महत्त्व तो आज ही का है।

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