समय का मूल्य !!!

जिसने जाना मूल्य समय का, वह आगे बढ़ पाया है।
आलस कर जो बैठ गया, वह जीवन भर पछताया है।



धीरे धीरे चलकर कछुआ, जीत दौड़ में जाता है।
एक एक तिनके से पंछी, अपना नीड़ बनता है।।

लेकिन बन्दर अपने लिए घर, बना न पाया है।
आलस कर जो बैठ गया, वो जीवन भर पछताया है।।

सोमवार को जन्मे, मंगलवार को बड़े हुए।
बुद्धवार को विवाह हुआ, गुरुवार को संतान हुई।।

शुक्रवार को बीमार पड़े, शनिवार को अस्पताल में दाखिल हुए।
और रविवार को चल वसे।।

फूलों का सार इत्र है, जीवन का सार चरित्र है।
जिसने इत्र पा लिया, उसने ज्ञान पा लिया।।

जिसने चरित्र बटोर लिया, उसने "भेद-विज्ञान" पा लिया।
नहीं तो पैदा हुए बैसे ही मर गये।।

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