कृषक-मित्र बनें, कृषक-शत्रु नहीं। उनसे प्रेम करें, नफरत नहीं।

कृपया पूरा पढ़े हालाँकि आप इसे पढ़ने के लिए बाध्य नहीं हैं।

  • 5 रूपये वाली 'बीयर' की बोतल आज 80 रुपये में बिक रही है, क्या आप में से किसी ने कभी 'बीयर' अथवा 'दारु' का ठेका फूँका? इसका मतलब यह कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि मैं बीयर अथवा शराब को सस्ते में बेचे जाने का पक्षधर हूँ।
  • 300 ml की 25 पैसे कीमत वाली कोकाकोला/पेप्सी आज 12 रुपये की एवं 1.0 लीटर वाली माज़ा 50 रूपये में बिक रही है, क्या कभी किसी ने अमेरिका का पुतला फूंका? इसका मतलब यह नहीं कि मैं कोल्ड ड्रिंक्स को को सस्ते में बेचे जाने का पक्षधर हूँ।
  • मुफ्त में मिलने वाले ताजे पानी एवं प्याऊ की जगह, 15-20 रूपये में मिलने वाली एक-डेढ़ लीटर की बोतल ने ले ली है, क्या कभी किसी ने सरकार से रेलवे-स्टेशन, बस-स्टैंड के साथ साथ सार्वनिक जगहों पर मुफ्त पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए मांग उठाई?
  • 5 रूपये वाला Mac-Donald बर्गर आज 55 रुपये में बिक रहा है, क्या कभी किसी ने Mac-Donald के विरोध में रेल रोकी?
  • 5 रूपये का चिप्प्स का पैकेट आज 30 रूपये में बिक रहा है, क्या कभी किसी ने इसके खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया?
  • 5 रुपये में मिलने वाला सिनेमाघर का टिकिट आज 100, 300, 500 रूपये का हो गया, क्या कभी किसी ने कोई सिनेमा हॉल फूँका? नहीं, कभी नहीं। आखिर हम सभ्य लोग जो ठहरे, हमें भला इन सब कामों के लिए फुरसत कहाँ?



          क्या हमने कभी फिल्मों के लिए अभिनेताओं एवं अभिनेत्रियों द्वारा लिये जाने वाले मोटे मेहनताने का विरोध किया? जबकि यह बढ़ा हुआ पैसा सिनेमाघर की बढ़ी हुई टिकटों के रूप में हमारी जेब काटकर चुपचाप वसूल लिया जाता है और हमें पता भी नहीं चलता। क्या इन फिल्मों, धारावाहिक एवं टीवी कार्यक्रमों का महत्त्व हमारे जीवन में भोजन से अधिक कभी हो सकता है?

          इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ब्रांडेड जूतों एवं ब्रांडेड कपड़ों का बाजार भाव इनकी लागत मूल्य से कई गुना ज्यादा होना हमें कभी नहीं अखरता। हमें पता भी नहीं चलता कि इनकी कीमतें कब और कीतनी बढ़ गयी? क्या हमारे जीवन में इन सभी चीजों का महत्त्व भोजन से अधिक संभव है? ऐसी बहुत सी अन्य बस्तुएं हैं जिनका हमारे जीवन में होना कतई अनिवार्य नहीं है।

          जबकि किसानों के उत्पादों, जिनसे हमारी उदर-पूर्ती होती है, हमारे जीवन का संचालन होता है, की कीमत जरा भी बढ़ जाय तो आसमान सर पर उठा लिया जाता है। याद रखिये, ये प्रश्न आपके समक्ष यक्ष-प्रश्न बनकर खड़ें हैं। यदि आप जबाब नहीं दे सकते तो कदाचित् महँगाई के विरुद्ध बोलने का आपको कोई अधिकार नही रह जाता।

          चीनी 2 रुपये महँगी क्या हुई, सभी न्यूज़ चैनल्स एवं समाचार पत्रों की पहली खबर बन गई। आलू, प्याज, टमाटर आदि सब्जियों, फलों एवं दालों की कीमत में बृद्धि होते ही सब छाती पीटने लगते हैं। वह भी महँगा होता है सिर्फ थोड़े दिनों के लिये और कभी कभी। यहाँ तक कि कृषकोपार्जित कई खाद्यान्नों की कीमतें दशकों से नहीं बढ़ी हैं। जबकि सब भली-भांति जानते हैं कि महँगाई का सारा मजा जमाखोर एवं कृषक-उपभोक्ता के बीच के बिचौलिये लूट लेते हैं न कि किसान। किसान द्वारा उत्पादित अन्न, फल, दाल, सब्जियों के उत्पादक से उपभोक्ता तक पंहुचने के बीच कई लोग मोटा मुनाफा भी कमाते हैं। जैसे स्थानीय मंडी तक सामान पंहुचाने वाला वाहन-चालक, स्थानीय मंडी वाला, स्थानीय मंडी से दूसरी किसी मंडी तक सामान पंहुचाने वाला, दूसरी मंडी वाला, मंडी से खरीदकर बाजार में उपभोक्ताओं को बेचने वाले द्वारा कमाया जाने वाला सर्वाधिक मुनाफा, इस बीच सरकार के टेक्स आदि आदि भी। जरा कल्पना कीजिये कि इस बीच हमारे किसान भाई को क्या मिलता होगा?

          जबकि किसानों के लिए बिजली की कीमत एवं फसल की कटाई करने वाले मजदूरों की मजदूरी का खर्च बढ़ चुका हैं। बीजों, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के दाम 100 फ़ीसदी से लेकर कई हजार फ़ीसदी तक बढ़ चुके हैं। डीजल के दाम बढ़ने के कारण खेत में ट्रैक्टर के द्वारा फसल बोने का खर्च, मशीन द्वारा फसल की कटाई का खर्च एवं कटी हुई फसल को बाजार अथवा मंडी तक पंहुचाने का खर्च कई गुना बढ़ चुका है। ऊपर से मानसून का कहर अलग से। बारिश हो, न हो, कोई जरुरी नहीं। साथ ही अल्पबृष्टि, अतिबृष्टि, ओलाबृष्टि, सूखे के साथ-साथ आर्थिक तंगी एवं अन्य सामाजिक समस्याओं का प्रकोप अलग से। अधिकतर किसान साहूकारों के क़र्ज़ तले दबे हुए होते हैं। जो कई बार फसलों के प्राकृतिक विपदा के कारण नष्ट हो जाने अथवा बाजार में फसल का उचित मूल्य न मिल पाने के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ता जाता है एवं एक समय ऐसा आता है जब उसकी जमीन-जायदाद साहूकार द्वारा हथिया ली जाती है और उसे सपरिवार दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती है। फलस्वरूप पिछले कुछ वर्षों में किसानों द्वारा आत्महत्या में भारी से बहुत भारी बढ़ोतरी हुई है। भारत  कृषि प्रधान देश है ! यदि हमारा किसान यूँही आत्महत्या करता रहा तो भारत मर जायेगा।

          अगर किसान कुछ दिन अपनी पैदावार ना बेचें तो महँगाई का रोना रोने वालों को अपनी औकात पता चल जाये। किसान तो खैर जैसे-तैसे जीवन-यापन कर लेगा। अत: रेल को भारत की लाइफ-लाइन बताने वाले लोग यह समझ लें कि देश की असली लाइफ लाइन रेल नहीं बल्कि भारत की कृषि है। इसीलिए कहता हूँ भाइयों किसान से प्रेम करें। उनका सम्मान करें, उनकी सहायता करें। किसानों के उत्पादों की कीमत बढ़ने पर इतना रोना ना रोया करें।

          साथ ही Business Man बनने के आकांक्षी मित्रों से मेरा एक प्रश्न है, आप इसे अनुरोध भी समझ सकते हैं - क्यूँ ना कुछ अलग करने की ख्वाहिश रखने वाले मित्र, कृषि क्षेत्र में निवेश करें और कृषकों के साथ मिलकर एक ऐसा "कृषक-कृषि-उपभोक्ता (FFC*)" तंत्र विकसित करें जो पूरे देश के लिए एक मिशाल बन जाए। यह तंत्र पूर्णतया जैविक कृषि (Organic Farming) पर आधारित हो तथा जिसमें रासायनिक उर्वरक (Chemical Fertilizers), रासायनिक कीटनाशक (Chemical Pesticides) एवं संकर बीज (Hybrid Seeds) के बजाय जैविक खाद, जैविक कीटनाशकों एवं देशी बीजों का उपयोग हो। जिसके लिए देव संस्कृति विश्व विद्ध्यालय (हरिद्वार)पतंजलि योगपीठ (हरिद्वार)राजीव दीक्षित स्वदेशी उत्थान संस्थान, स्वदेशी ग्राम, सेवाग्राम, वर्धा (महाराष्ट्र) एवं कई अन्य प्रख्यात देशी संस्थान निशुल्क अल्पावधि एवं पूर्णकालिक प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। जिसमें सिखाया जाता है कि जैविक खेती कैसे करें, जैविक खाद एवं जैविक कीटनाशक स्वयं ही अल्पावधि में एवं कम लागत में कैसे तैयार करें। पूर्णकालिक कोर्स में आप जैविक खेती का प्रायोगिक प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकते हैं। आप खेत में बैठे-बैठे अपनी वेबसाइट एवं सोशल मीडिया के सहयोग से स्वयं ही इसकी ऑनलाइन मार्केटिंग एवं ट्रेडिंग भी कर सकते हैं। इस विषय को थोड़ा सोच विचार कर और अधिक परिष्कृत किया जा सकता है। कुल मिलाकर यह आपके लिए भी और किसान के लिए भी काफी फायदे का व्यवसाय बन सकता है और आप आत्म संतुष्टि भी महसूस करेंगे। सबसे अहम् बात यह है कि इस क्षेत्र में आपके लिए पूरी तरह प्रतिस्पर्धा रहित ओपन मार्केट उपलब्ध है।

          आपको मेरी किसी भी विचार से सहमत अथवा असहमत होने का पूरा अधिकार। फिर भी अपनी किसी भी त्रुटी के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ एवं अपनी भूल सुधारने के लिए प्रस्तुत हूँ। कृपया अपनी बहुमूल्य टिपण्णी द्वारा त्रुटी से अवगत करायें।



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