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भारत की ऊर्जा सुरक्षा में ओएनजीसी विदेश (ओवीएल) का योगदान।

संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार ऊर्जा को ना कभी नष्ट किया जा सकता हैं और ना ही सृजित। ऊर्जा को सिर्फ एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है। इस ब्रम्हाण्ड की कुल ऊर्जा नियत है।

        जिस प्रकास एक मानव शरीर के सुचारू सञ्चालन के लिए ऊर्जा की जरुरत अहम होती है, ठीक उसी प्रकार किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा को पूरा किये बिना उच्च विकास दर से गति देना संभव नहीं है। दुनियाभर में विभिन्न ऊर्जा स्रोतों के बढ़ते दोहन के लिए प्रमुख कारण भी यही है ताकि वहाँ की सरकारें अपने नागरिकों की जिंदगी, व्यवसाय, विनिर्माण क्षेत्र, आईटी सेक्टर, गुड गवर्नेंस एवं शिक्षा के क्षेत्र को गति दे सकें। समय के साथ ऊर्जा की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए देश में कई निजी एवं सार्वजानिक क्षेत्र की बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ नए ऊर्जा क्षेत्रों की खोज, अनुसंधान एवं उनके विकास में बड़ी भारी मात्रा में निवेश कर रहे हैं। साथ ही इन ऊर्जा स्रोतों से संसाधनों के दोहन, परिष्करण एवं वितरण पर भी काम कर रही हैं। विभिन्न प्रकार के ऊर्जा स्रोतों के प्रकार के आधार पर देश में प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी), आईओसीएल, बीपीसीएल, एनएचपीसी, …