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प्रियंका और ऋषि की अमर प्रेम कहानी - मेरी पहली कहानी।

बात उन दिनों की है जब अल्मोड़ा के पास स्थित छोटे से गाँव हरियापुर में नौजवानों और नवयुवतियों की एक नई जमात तैयार हो रही थी। प्रियंका और ऋषि भी उन्हीं में से थे। संयोग से दोनों एक दूसरे के पड़ौसी भी थे। एक दिन सुबह-सुबह जब ऋषि रोज की तरह दौड़ लगा के आ रहा था तो सामने से जाती प्रियंका से चलते-चलते पूँछा- क्या हाल चाल है प्रियंका, सब मजे में? प्रियंका ऋषि के प्रश्न को जानबूझकर अनसुना करते हुए अपने रसभरे अधरों पर मंद शरारती मुस्कान बिखेरती हुई व इठलाती हुई आगे बढ़ गयी। उसकी इसी मादक अदा के ही तो दीवाने थे हरियापुर के सभी नवयुवक। लेकिन ऋषि को प्रियंका का यूँ अनदेखा किया जाना बिलकुल अच्छा नहीं लगा।
        दोनों के परिवारों में थोड़ी आपसी कलह अलग थी। कभी-कभार हाय-हैलो भर हो जाया करती थी। वैसे भी दोनों एक ही गांव के होते हुए भी अलग-अलग कुटुंब व अलग-अलग जाति से थे। जहाँ प्रियंका उच्च कुलीन वर्ग के ब्राम्हण परिवार से थी वहीं ऋषि एक दलित समुदाय से ताल्लुक रखता था। प्रियंका के पिता गाँव के मंदिर में पुजारी व माँ पास ही के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका थी। दूसरी और ऋषि के पिता सामान्य कृषक व मजदुर थे …